देश के प्रमुख गांधीवादियों में एक थे आचार्य कृपलानी

आचार्य कृपलानी

देश के प्रमुख गांधीवादियों की अगर हम बात करें तो उसमें आचार्य कृपलानी जी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। आचार्य कृपलानी देश के प्रसिद्ध स्वाधीनता सेनानी, गांधीजी के विचारों के प्रचारक और लम्बे समय तक गांधीजी के निकट सहयोगी में रहे। अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महामंत्री तथा अध्यक्ष रहे आचार्य कृपलानी जी का पूरा नाम जीवतराम भगवान दास कृपलानी था। कृपलानी जी का जन्म 1888 ईस्वी में हैदराबाद (सिंध) में एक क्षत्रिय परिवार में हुआ था। कृपलानी जी के पिता काका भगवान दास तहसीलदार थे।

ऐसे हुआ महात्मा गांधी से सम्पर्क

आचार्य कृपलानी जी ने एक शिक्षक के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की। आचार्य कृपलानी जी 1912 से 1917 तक बिहार के मुजफ्फरपुर कॉलेज में अंग्रेजी और इतिहास के प्रोफेसर रहे। तब महात्मा गांधीजी ने चम्पारण की प्रसिद्ध यात्रा की थी और कृपलानी उनके निकट सम्पर्क में आये। 1919-20 में वे कुछ समय तक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भी रहे और असहयोग आन्दोलन के समय वहा से हट गये। असहयोग आन्दोलन आरम्भ होने पर विद्यालयों का बहिष्कार करनवाले छात्रों के लिए गांधीजी की प्रेरणा से कई प्रदेशो में विद्यापीठ स्थापित किये गये थे।

कृपलानी से आचार्य कृपलानी

आचार्य कृपलानी जी 1920 से 1927 तक गुजरात विद्यापीठ के प्राचार्य भी रहे। वहीं से आचार्य कृपलानी के नाम से प्रसिद्ध हुए। 1927 के बाद आचार्य कृपलानी का जीवन पूर्णरूप से स्वाधीनता संग्राम और गांधीजी की रचनात्मक प्रवृतियों को आगे बढ़ाने में ही बीता उन्होंने खादी और ग्राम उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए उत्तर प्रदेश में गांधी आश्रम नामक संस्था की स्थापना करी। कृपलानी जी हरिजनोंद्धार के लिए महात्मा गांधीजी की देशव्यापी यात्रा में बराबर उनके साथ रहे।

अखिल भारतीय कांग्रेस में सफर

आचार्य कृपलानी जी ने 1935 से 1945 तक कांग्रेस के महासचिव के रूप में काम किया। 1946 की मेरठ कांग्रेस के कृपलानी जी अध्यक्ष चुने गये थे। कई प्रश्नों पर नेहरु जी मतभेद हो जाने के कारण उन्होंने अध्यक्षता छोड़ दी और “किसान मजदूर प्रजा पार्टी” बनाकर विपक्ष में चले गये। कृपलानी जी एकाधिक बार लोकसभा के सदस्य रहे। आचार्य कृपलानी जी ने सभी आंदोलनों में भाग लिया और जेल की सजा भी काटी। कृपलानी जी की पत्नी सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रही। 1982 में आचार्य कृपलानी का निधन हो गया।

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