पढ़ें महात्मा गांधी ने कब-कब दक्षिण अफ्रीका और हिन्दुस्तान में जेल यात्राएं कीं

महात्मा गांधी

दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी और जेल यात्राएं

10-30 जनवरी 1908: पंजीकरण न करने तथा नाताल न छोड़ने के लिए दो महीने की साधारण कारावास की सजा
7-12 अक्तूबर 1908: नाताल से लौटने पर पंजीकरण पत्र जो उन्होंने जला दिया था, न दिखाने पर कठोर कारावास
25 फरवरी 1909: गिरफ्तारी, ट्रांसवाल में तीन महीने की सजा, कारण पंजीकरण पत्र नहीं था
6 नवम्बर 1913: पामफोर्ड में विशाल पदयात्रा के बाद गिरफ्तारी, 7 तारीख को कैलनबाक की जमानत पर रिहा
8 नवम्बर 1913: पुन: गिरफतारी और जमानत पर रिहा
9 नवम्बर 1913: गिरफतारी तथा 9 महीने के कारावास का दंड। फोक्सरस्ट में और तीन महीने की सजा। परन्तु 18 दिसम्बर 1913 को अचानक रिहाई

हिन्दुस्तान में गांधी जी और जेल यात्राएं
16 अप्रैल 1917: चम्पारण की यात्रा में जिला छोड़ने का आदेश दिया गया
10-11 अप्रैल 1919: पलवल में अमृतसर जाते हुए गिरफ्तार किए गए और बम्बई ले जाकर 11 अप्रैल को छोड़ दिया गए
10 मार्च 1922- 5 फरवरी 1924: यंग इन्डिया में तीन लेखों के कारण गिरफ्तार किए गए। छ: साल की सजा। 5 फरवरी 1924 को बिना शर्त यरवडा जेल से रिहा किए गए।
4 मार्च 1929: कलकत्ता में विदेशी कपड़ों की होली जलाने पर गिरफ्तारी और रिहाई
5 मई 1930: प्रात: 00:45 बजे नमक सत्याग्रह के दौरान कराड़ी में गिरफ्तारी, 26 जनवरी 1931 को उपवास आरंभ किया
4 जनवरी 1932: बम्बई में प्रात: तीन बजे गिरफ्तारी, यरवड़ा जेल ले जाए गए। 8 मई 1933 को उपवास आरंभ किया, उसी दिन शाम के छ: बजे रिहा किए गए।
1 अगस्त 1933: गिरफ्तार किए गए। 4 अगस्त को प्रात: 9 बजे रिहा किए गए, सरकार ने शर्त रखी कि प्रात: 9.30 बजे तक यरवडा की सीमा से बाहर हो जाएं। गांधीजी ने शर्त मानने से इनकार किया। इसीलिए प्रात: 9.50 बजे पुन: गिरफ्तार किए गए और एक साल के कारावस का दंड दिया गया। 16 अगस्त को अनशन आरम्भ किया और 23 अगस्त को स्वास्थ्य खराब होने के कारण बिना शर्त रिहा कर दिया गया
9 अगस्त 1942: हिन्दुस्तान सुरक्षा कानून के अन्तर्गत गिरफ्तार किए गए। गिरफ्तारी का कारण हिन्द छोड़ों प्रस्ताव था। आगा खां महल, पूना में गांधीजी को नजरबंद रखा गया। 6 मई 1944 को प्रात: 8 बजे रिहाई।

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